>चुप किया जाना एक सजा है तुम्‍हारी खातिर

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चुप किया जाना
एक सजा है तुम्‍हारी खातिर

जबान और हाथों को जब
रोक दिया जाता है
शालीन अश्‍लीलता से
तो असंतोष की किरणें
फूटने लगती हैं
तुम्‍हारी निगाहों से
और कई बार
उसकी मार तुम
अपने भीतर मोड देती हो

तब
तुम्‍हारे मुकाबिल होना
एक सजा हो जाता है
मेरे लिये

एक सजा
जिसे पाना
अपनी खुशकिस्‍मती समझता हूं मैं

मेरी कुटुबुटु
कि
हमारा रिश्‍ता ही दर्द का है
जिसकी टीस को
जब संभाल लेती है मेरी कविता
तब कविता का महान व्‍योपार
कर पाती है वह
तब
देख पाता हूं
जान पाता हूं मैं
अपने कवि होने की बुनियाद।

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6 Comments »

  1. 1

    >सुंदर रचना के लिए साधुवाद

  2. >विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें।आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी हैकल (18/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकरअवगत कराइयेगा।http://charchamanch.blogspot.com

  3. >sundar rachna!kavi hriday hi kavi hone ki buniyad jaan sakta hai!kavi hriday aur unki kavita ko naman!regards,nice blog!!!

  4. 6
    Dorothy Says:

    >अपने आस पास के घनीभूत पीड़ा संसार की व्यथा से उद्वेलित, छटपटाते और उसमें कोई सकारात्मक हस्तक्षेप या कोई भूमिका तलाशने की अपनी असफ़ल और निरर्थक प्रयासों से थके टूटते मन की संवेदनाओं की मर्मस्पर्शी और संवेदनशील अभिव्यक्ति. आभार. सादर डोरोथी.


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