>`ख´महाशय के किस्‍से-1

> अपनी पिटाई का किस्सा – कुमार मुकुल

`ख´ महाशय को कॉलेज जाते अब छ: महीने हो चले थे । वे चुपचाप ग्यारह बजे लॉज से निकलते और सड़क की भीड़ में शामिल कॉलेज पहुंच जाते । कॉलेज में एकाध दोस्त बनाए थे, सो क्लास के बाद सीिढयों पर बैठ समय काटते । न चाय की आदत थी न सिगरेट की हां फिल्में खूब देखते थे पर अकेले ।

एक दिन जब वे भातिकी के क्लास में लक्चर सुन रहे थे एक अबंड लड़के ने उनकी काली कमीज पर सफेद चाक से कुछ लिख दिया `ख´ महाशय ने इस हरकत पर बस पीछे मुड़कर देखा और फिर लेक्चर सुनने लगे ।
अगले क्लास में `ख´ महाशय उस लड़के के पीछे बैठे थे । क्लास के दौरान उन्होंने भी उसकी पीठ पर कुछ लिख मारा । इस पर लड़के ने आंखे गुरेरी और फुसफुसाया निकलो तो बताते हैं । `ख´ महाशय ने इसे गंभीरता से नहीं लिया । तत्कालिक तौर पर उन्होंने अपने जूते के आगे के भाग में कुछ कीलें उल्टी खोंस ली कि लड़के ने कुछ किया तो इन्हीं से प्रहार किया जाएगा । पर लेक्चर के दौरान वे सब भूल गए कि लड़के ने चेतावनी दी थी ।

क्लास के बाद जब लेक्चरार बाहर गए और `ख´ महाशय सीढ़ीनुमा क्लास रूम में नीचे उतरने लगे । अभी आखिरी सीढ़ी पर वे पहुचे थे कि उन्हें अपने चारों ओर कुछ लहराता दिखा फिर फट-फट कर आवाज सुनाई दी । वे अकचकाए खड़ा थे । तब उन्हें अहसास हुआ कि यह आवाज बेल्ट की है और यह उन्हीं पर फटकारी जा रही है ।

`ख´ महाशय अभी भी कुछ समझ नहीं पा रहे थे तब-तक उन्होंने देखा कि कुछ लड़के उस अबंड लड़के को घूंसों-मुक्कों से पीट रहे हैं । `ख´ महाशय के पास खड़ा लड़का उन्हें उकसा रहा था मारो ससुर को दो हाथ तुम भी । तब उन्हें अपने जूते में खोंसी पिनें याद आईं । तो लड़के `ख´ महाशय की पिटाई के एवज में ही उसे पीट रहे थे । `ख´ को लगा कि दुनिया अभी है और रहेगी ।

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