>वसंती की प्रेरणा और कालिदास – कुमार मुकुल

>काशीनरेश भीमशुक्‍ल की विदुषी पुत्री वसंती ने कई विद्वान लड़कों के विवाह प्रस्‍ताव को यह कहकर खारिज कर दिया था कि वह उस लड़के से ज्‍यादा बुद्धिमान है। उसके योग्‍य लड़का राजा और दरबारी खोज नहीं पा रहे थे तो तंग आकर उसे पाठ पढ़ाने के लिए कालिदास को ढूंढ लाए थे।
दरअसल दरबारियों ने एक दिन देखा कि एक आदमी पेड़ की जिस डाल पर बैठा है उसी को काट रहा है। उन्‍हें लगा कि वासंती के लिए यही लड़का ठीक रहेगा। उन्‍होंने उसे यह सिखला कर राजदरबार लाया कि उसे कुछ बोलना नहीं है हर सवाल का जवाब उसे ईशारे में देना है। दरबारियों ने कहा कि लड़का अतिशय विद्वान है और हर सवाल का जवाब ईशारे में देने की क्षमता रखता है। लड़का सुंदर था तो वासंती उससे शास्‍त्रार्थ को तैयार हो गई।
वसंती ने जब लड़को को एक उंगली दिखाते हुए पूछा कि क्‍या ब्रह्म एक है तो लड़के ने समझा कि लड़की कह रही है कि वह उसकी एक आंख फोड़ डालेगी तो जवाब में उसने दो उंगलियां दिखा दीं कि वह उसकी दोनों आंखें फोड़ देगा। वासंती को लगा कि लड़का कह रहा है कि ब्रह्म दो है- सगुण और निर्गुण। उसे लगा कि वह वाकई विद्वान है। वह विवाह को राजी हो गई।
बाद में जब वसंती को सच्‍चाई का पता चला तो उसने इसे चुनौती के रूप में लिया और अपने भोले-भाले पति को पढ़ा लिखा कर महान रचनाकर बनने की प्रेरणा दी।
कालिदास की रचनाओं में उज्‍जैन नगरी का जिक्र बार-बार आता है इससे लगता है कि उनके जीवन का बड़ा हिस्‍सा वहीं गुजरा था। कहा जाता है कि आज से चौदहसौ साल पहले हुए राज बिक्रमादित्‍य के नवरत्‍नों में कालिदास भी थे। कालिदास ने काफी यात्राएं कीं थीं। उनकी रचनाओं में आसाम,बंगाल,उड़ीसा से लेकर पांड्या , केरल और सिंध , गांधार तक की चर्चा है। अपने वर्णनात्‍मक काव्‍य मेघदूत में यक्षिणी का प्रणय संदेश लेकर घूमते मेघ के द्वारा कालिदास ने भारत के विभिन्‍न भू-भागों का परिचय कराया है।
महाकाव्‍य रघुवंश कलिदास की महत्‍वपूर्ण रचना है। हिन्‍दी में महाकवि तुलसीदास ने रामचारित मानस में राम की आदर्श मयार्दारक्षक वाली छवि स्‍थापित की है पर रधुवंश में कालिदास ने राम के पूर्वज रघु और राम के बाद की पीढ़ी का भी आलोचनात्‍मक वर्णन किया है। राम के पूर्वजों दिलीप,अज,दशरथ की गौरव गाथा लिखने के साथ कालिदास ने रघु के वंश के अंतिम अय्याश राज अग्निवर्ण तक की गाथा लिखी है।
कालिदास के जन्‍म की तरह उनकी मृत्‍यु पर भी विवाद है। जन्‍मते ही उनके माता-पिता चल बसे थे और वे अनाथ हो गये थे उसी तरह उनकी हत्‍या एक नगरवधू के निवास पर धोखे से हो गयी थी।
दुनिया की प्राचीन भाषाओं में अवेस्‍ता, संस्‍कृत , लैटिन आदि हैं। कालिदास संस्‍कृत के कुछ महत्‍वपूर्ण रचनाकारों में हैं। कुमार संभव, विक्रमोवर्शीय, मालविकागिन आदि उनके प्रसिद्ध नाटक हैं। संस्‍कृत की चर्चित उक्ति है – काव्‍येषु नाटक: रमणं, नाटकेषु शकुंतला। काव्‍यों में नाटक रमणीय है और नाटकों में कालिदास की शकुंतला। अभिज्ञान शाकुंतलम उनका प्रसिद्ध नाटक है।

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