>मेरे ‘सुखी पारिवारिक जीवन’ में अब कोई रोशन दिन नहीं होगा – लीडिया

>चेखव और लीडिया पहली मुलाकात के तीन साल बाद जब मिलते हैं वे तो बडे मजाकिया लहजे में बातें करते हैं। वे सोचते हैं कि उनका संबंध जरूर पूर्वजन्‍म का है और शायद वे पिछले जन्‍म में प्रेमी हों और एक साथ डूबकर मरे हों। हंसी की इन बातों के बाद चेखव उलाहना देते हैं कि कितनी बुरी हो तुम , जाकर कुछ भेजा नहीं , मैंने तुमसे कहानियां मांगी थी …। अभी उनकी बातचीत आरंभ ही हुयी थी कि चेखव को उनके प्रशंसक ले गये। यहां मजेदार यह है कि आज कल की तरह उस काल में रूस में भी लेखकों के साथ अफवाह उडाने वालों का एक तबका भिडा रहता था, सो उनमें किसी ने उडा दिया कि पार्टी में चेखव ने नशे में धुत्‍त होकर कहा कि वे लीडिया के पति से उसे तलाक दिला कर शादी करने वाले हैं। यह सब सुनकर लीडिया की समझ में कुछ आ नहीं रहा था कि वह क्‍या करे …। अंत में चेखव से लीडिया की भेंट हुयी तो चेखव ने कहा कि मुझे लेकर दुनिया भर के ऐसे ही अफवाह हैं – कि , मेरी शादी एक अमीरजादी से हुयी है, कि अपने मित्रों की पत्नियों से मेरे संबंध हैं वगैरह वगैरह…।
फिर चेखव ने लीडिया से विदा ली तो उदासमना लीडिया ने सोचा – मेरे सुखी पारिवारिक जीवन में अब कोई रौशन दिन नहीं होगा …।
इस मुलाकात के बाद चेखव के साथ उनका पत्राचार चलने लगा। लीडिया चोरी छुपे डाकघर जाकर चेखव के पत्र लाती । कभी कभार एकाध पत्र वह अपने पति मिखाइल को दिखा देती थी। इस पर उसके पति ने कहा कि मेरी दिलचस्‍पी इसमें नहीं कि चेखव तुम्‍हें क्‍या लिखते हैं अगर दिखा सको तो तुम यह दिखाओं कि अपने पत्र में तुम उन्‍हें क्‍या लिखती हो। पर लीडिया ने कभी अपने पत्र चेखव को नहीं दिखाए।
कुछ दिनों बाद चेखव फिर पीटर्सबर्ग आए तो लीडिया उनसे मिली। तब चेखव ने उससे उसके बच्‍चों के बारे में पूछ – तो लीडिया ने बहुत उत्‍साह से उन्‍हें इस बारे में बताया।
बातचीत में लीडिया ने चेखव को सलाह दे डाली कि अब आपको शादी कर लेनी चाहिए। तो चेखव ने कहा कि मुझे इसकी फुर्सत कहां है, फिर उन्‍होंने लीडिया से सवाल किया कि …. क्‍या तुम सुखी हो
लीडिया को अब जवाब नहीं सूझ रहा था – वह बोली – मेरे पति बहुत भले हैं और बच्‍चे भी। पर किसी का भला लगना और सुखी होना दोनों में अंतर है ना …मुझे लगता है जैसे मैं घिर गयी हूं … मेरा कोई अस्तित्‍व नहीं रहेगा। क्‍या इसी का नाम सुख है ..।
इस पर चेखव ने उत्‍तेजना में परिवार और स्‍त्री की पराधीनता की आलोचना करते कहा कि अपनी प्रतिभा को पहचानो।
फिर बात बदल कर चेखव ने कहा अगर मैंने शादी की होती तो मैं अपनी पत्‍नी से अलग रहने के लिए कहता … ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा समय साथ बिताने से आपसी व्‍यवहार में जो असावधानी या अशिष्‍टता का पुट आ जाता है, वह हमारे बीच न आ पाए।
घर पहुंचने पर उनके पति ने दरवाजा खोलते हुए कहा कि तुम्‍हारे बिना हम सब अनाथ हो जाते हैं …।
अपने घर में पति के पास लेटी लीडिया सोच रही थी कि उसे चेखव से प्‍यार है … ।

Advertisements

3 Comments »

  1. >सुखी जीवन के लिए दिल को रोशन रखे. बढ़िया अभिव्यक्ति. आभार.

  2. 2

    >कितना जटिल है मानव मन और उसका व्यवहार -ख़ास तौर पर नारी जिसे समझना पुरुष क्या ईश्वर के वश में भी नहीं है -मैं तो इसी निष्कर्ष पर पहुंचता हूँ की वह छलना है और युगों युगों से बस छलती ही रही है ! चेखव के इस वृत्तांत के लिए आभार

  3. 3

    >शायद मेरी पहली टिप्पणी पोस्ट नहीं हो पायी ! आपने चेखव और लीडिया के बहाने मानंव मन के गह्वरों में झाँकने का एक अवसर दिया -धन्यवाद ! नारी तो सदैव छलती ही आ रही है -शेक्सपियर ने नहीं कहा था -छलने तुम ही तो हो नारी !


RSS Feed for this entry

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: