>चरवाहे शहंशाह बन सकते हैं – कुमार मुकुल

>चरवाहे शहंशाह बन सकते हैं बने हैं शहंशाह
शहंशाह बन नहीं सकता चरवाहा चाहकर भी
तानाशाह बन सकता है वह

भोला-भाला व्‍यक्ति
बन सकता है पंडित ज्ञानी विराट
ज्ञानी हो नहीं सकता मूर्ख
पागल हो सकता है वह

आकाश छूती जमीन को
पाट सकते हो अटटालिकाओं से
खींच सकते हो
कई-कई और चीन की दीवार
उसे बदल नहीं सकते समतल भूमि में
खंडहर बना सकते हो
वहां बोलेंगे उल्‍लू।

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5 Comments »

  1. >बहुत बढिय रचना है।बधाई।चरवाहे शहंशाह बन सकते हैं बने हैं शहंशाहशहंशाह बन नहीं सकता चरवाहा चाहकर भीतानाशाह बन सकता है वह

  2. 3

    >अरे वाह, क्या बात कही है आपने.

  3. >आप अच्छा शब्द तीर चलाते हो ….आपके बारे मे इतना ही कहुगा जिन सवालो से आग लगती है जिन सवालो तीर मे चुभते है जिन सवालो से वक्त रूक जाये उस फलक पे ये गीत क्यु गाये …..

  4. >बहुत सटीक बात कही है आपने


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