>कचरा दिल्‍ली क्‍यों नहीं जा सकता – कुमार मुकुल – व्‍यंग्‍य

>गांधी मैदान पटना के दक्षिण की सड़क पर चलता हुआ मैं इक्‍कीसवीं सदी की ओर जा रहा हूं। कल किसी और सड़क पर चलता हुआ भी मैं इक्‍कीसवीं सदी की ओर ही जा रहा होउंगा। यहां तक कि परसों अगर गांव की नदी से नहाकर खेतों की ओर जा रहा होउं तब भी मेरा जाना इक्‍कीसवीं सदी की ओर ही होगा। मैं अगर कहीं नहीं भी जाता रहूं, घर में बैठा रहूं तब भी गांधी मैदान वाली सड़क अगली सदी में जा रही होगी। मतलब इक्‍कीसवीं सदी में जाना एक सनातन सत्‍य है, उसको हमारे विकास या स्थिरता से कोई अंतर नहीं पड़ता।
तो इक्‍कीसवीं सदी को जाती इस सड़क के बाएं नेताजी सुभाष बाबू की मूर्ति है। जो गंगा की ओर इशारा कर रही है। मानो कह रही हो गंगा की ओर चलो। पर जिन्‍होंने सुभाष बाबू को पढा होगा वे जानते हैं कि सुभाष बाबू का इशारा दिल्‍ली की ओर है। उनका नारा था… दिल्‍ली चलो। यह नारा उन्‍होंने दूसरे विश्‍वयुद्ध के समय दिया था। तब से वह दिल्‍ली नहीं पहुंच पाए हैं। मूर्ति तो यही कह रही है। जिस राजनेता ने यह मूर्ति लगवाई है उसका लक्ष्‍य भी दिल्‍ली जाना ही होगा। वैसे तमाम राजनेता आज अमेरिका और थाइलैंड जा रहे हैं। शायद दिल्‍ली का रास्‍ता अमेरिका या थाइलैंड होकर ही जाता है। सुभाष बाबू भी दिल्‍ली जापान होकर जाना चाह रहे थे। विवे‍कानंद भी अमेरिका होकर ही भारत आए थे।
फिलहाल सुभाष बाबू की मूर्ति के आगे कचरा है और मवेशी बंधे हैं। मवेशियों की पगही कोई खोल दे तो वे भी शायद दिल्‍ली जाना पसंद करेंगे। पर क्‍या कचरा भी चलकर दिल्‍ली जाएगा। साहब अगर कचरा पटना के मुहल्‍लों से निकलकर शहर के मध्‍य राजपथ पर लगी इस मूर्ति तक आ सकता है तो वह दिल्‍ली क्‍यों नहीं जा सकता।

Advertisements

4 Comments »

  1. >यार आपने जो कहा वह सब सही मान लेते हैं, पर पटना के कचरे को दिल्ली भेजने की बात मत करो. दिल्ली का अपना कचरा ही ठीक से हेन्डिल नहीं हो पाता. जीवन के हर क्षेत्र में घुस गया है यह कचरा, यहाँ तक कि दिमाग में भी. हर चलता हुआ आदमी कचरे का ड्रम नजर आता है.

  2. 2

    >जितने मवेशी खूँटा तुड़ा कर भागे हैं, साथ में कचरा भी तो घसीटते ले जा रहे हैं.

  3. 3

    >सही फ़रमाया आपने…अगर घर में बैठे रहें तो भी इक्कीसवी सदी तो आ ही जायेगी…और देश विदेश का सारा कचरा दिल्ली चला गया तो दुर्गन्ध तो चारों और ही फैलेगी!

  4. 4

    >KACHRA TO KACHRA HAI CHAHE VO dELHI KA HO YA PATNA KO HAME TO YE KOSIS KARNI CHAHIYE KI YE KACHRA HI NA RAHE ………SAYAD YEHI HMRE LIYE OR HAMARE ANE WALE PITHI KE LIYE BHEHTAR HOGA…


RSS Feed for this entry

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: