>मीना कुमारी – कविता – कुमार मुकुल

>
दर्द
तुम्‍हारी आंखों में नहीं
हमारी रगों में होता है

छू देती हैं
निगाहें

उभर आता है दर्द
फफोले-फफोले।

यह कविता मेरे दूसरे कविता संकलन सभ्‍यता और जीवन से है।

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3 Comments »

  1. >जितना खूबसूरत शेर उतनी ही खूबसूरत तस्वीर ।शुक्रिया ।

  2. 2
    मीत Says:

    >जैसे जागी हुई आंखों में चुभें कांच के ख़्वाबरात इस तरह दीवानों की बसर होती है -मीना कुमारी का ही एक शेर

  3. 3

    >`ये आँखें हैं तुम्हारी/या दर्द का उमड़ता समंदर…`


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