>भोजपुरी गीत – कुमार मुकल

>हमनी के देश काहे हो जाला राउर नेशन

हमनियों के हाथ-गोड़ बड़ुए रउए जइसन

काहे करींला फेन भेद-भाव अइसन

हमनी के बानी जा, एही से इ देश बा

कड़ी-कड़ी मूछ बा, आ बनल बनल बेश बा

हमनिए प टिकल बा राउर सब फैशन

कहे करींला रउआ भेद-भाव अइसन

खाट-खाटी बिनींला हमनी के राउर

छान-छप्‍पर छाईंला, देवार सबके चिनींला

तब काहे बइठब हमनी के बहरी

रहब जा काहे चउखट के बहरी

हमनी देश काहे हो जाला राउर नेशन
काहे करींला रउआ भेद-भाव अइसन।

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2 Comments »

  1. 1

    >”हमनी देश काहे हो जाला राउर नेशनकाहे करींला रउआ भेद-भाव अइसन।”मुकुल जी,राऊर ई कविता त एकदमे लाज़वाब लागल हमरा के.देस आ नेसन के भेद पर ई व्यंग सटीक बैठ ता.

  2. >बहुत बढ़िया लिखले बानी।धन्यवाद।


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